Tuesday, July 27, 2010

मौत के बाद वापसी


क्रिकेट के मैदान में कपिलदेव ने इतिहास रचकर महानतम की सीमा को तो काफी पहले ही छू लिया....लेकिन आज कपिलदेव ने इंसानियत की एक ऐसी मिसाल पेश की.... जिसे सुनकर हर किसी को कपिल पर न सिर्फ नाज होगा, बल्कि आंखे भी नम हो जाएंगी। कपिलदेव ने 63 साल से ऑस्ट्रेलिया में पड़े भारतीय हॉकर पूरन सिंह की अस्थियों को स्वदेश ले आए....1947 में पूरन सिंह ने ऑस्ट्रेलिया में आखिरी सांस ली...औऱ तब से उनकी अस्थियां गंगा की धारा का इंतजार करती रहीं…पूरन सिंह की अंतिम इच्छा को पूरा करने वाले कपिल आज अपने आप को बेहद खुशनसीब मानते हैं...
दरअसल ये कहानी है एक ऐसे भारतीय शख्स की जो 1899 में भारत से ऑस्ट्रेलिया जा पहुंचा...जहां उन्होंने 40 साल तक एक घोड़ा गाड़ी पर समान बेचते हुए बिताया...77 साल की उम्र में निधन से ठीक पहले उन्होंने अपना अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज से किये जाने की ख्वाहिश जाहिर की थी, साथ ही ये भी की उनकी अस्थियों को गंगा में बहाया जाए। निधन के बाद मेलबोर्न में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया और उनकी अस्थियों को विक्टोरिया के वारनांबूल के एक फ्यूनरल होम में रखा गया। निस्संतान हॉकर पूरन सिंह की अस्थियों को वहां के अधिकारियों ने इस उम्मीद में सुरक्षित रखा, कि एक न एक दिन उनका परिवार उन्हें जरूर लेने आएग। ये कहानी जब कपिल देव को पता चला तो उन्होंने खुद ऑस्ट्रेलिया जाकर उनकी अस्थिय़ों को भारत लाने का मन बनाया...बाद में भारतीय मीडिया में ये खबर आई तो पंजाब में उनके परिवार को ढूढ़ निकाला गया...पूरन सिंह के भाई के पोते हरमेल उप्पल के साथ कपिलदेव पूरन सिंह की अस्थियों को लेकर भारत पहुंचे। क्रिकेट के कारनामे को लेकर दुनिया से वाहवाही पाने वाले कपिल के, इंसानियत के लिए किये गए इस कारनामे ने. उनके नये मुरीद बना दिए हैं।

3 comments:

  1. इस जानकारी के लिये शुक्रिया, कपिल देव जैसों से ही ये उम्मीद की जा सकती है।

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  2. बहुत अच्छी खबर दी है आपने ये तो !!

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  3. बढ़िया रहा जानना!

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